कैसे सौर ऊर्जा 21वीं सदी की ऊर्जा जरूरतों का माध्यम बनेगी?

रीवा, मध्‍य प्रदेश: प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कल वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से मध्‍य प्रदेश के रीवा में अत्‍याधुनिक मेगा सौर ऊर्जा परियोजना राष्‍ट्र को समर्पित की। यह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है।


प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की अहम बातें

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प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मौजूदा दशक में रीवा परियोजना पूरे क्षेत्र को स्‍वच्‍छ और सुरक्षित ऊर्जा के बड़े केन्‍द्र के रूप में बदल देगी। उन्‍होंने कहा कि इस परियोजना से दिल्‍ली मेट्रो सहित रीवा और उसके आस-पास के समूचे क्षेत्र को बिजली की आपूर्ति की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द मध्य प्रदेश भारत में सौर ऊर्जा का मुख्य केंद्र होगा, क्योंकि नीमच, शाजापुर, छतरपुर और ओंकारेश्वर में ऐसी कई प्रमुख परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के गरीबों, मध्यम वर्ग के लोगों, आदिवासियों और किसानों को इसका सबसे ज्‍यादा फायदा मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि सौर ऊर्जा 21 वीं सदी में आकांक्षी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख माध्यम होगा। 

 

'निश्चित, शुद्ध और सुरक्षित'

प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा 'निश्चितशुद्ध और सुरक्षित' है। सूर्य से ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के कारण इसका हमेशा मिलना सुनिश्चित रहता है तथा पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण यह शुद्ध होती है और इसके अलावा यह हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए एक सुरक्षित स्रोत भी है

 

श्री मोदी ने कहा कि इस तरह की सौर ऊर्जा परियोजनाएं आत्मानिर्भर भारत (स्व-विश्वसनीय भारत) का सही प्रतिनिधित्‍व करती हैं।

 

आत्मानिर्भर भारत

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भरता और प्रगति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। अर्थव्यवस्था या फिर पारिस्थितिकी पर ध्यान केंद्रित करने की दुविधा का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य पर्यावरण के अनुकूल उपायों पर ध्यान केंद्रित करके ऐसी दुविधाओं का समाधान किया है। उन्‍होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी विरोधाभासी नहीं हैं बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।

 

उन्होंने कहा कि सरकार के सभी कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जीवन सुगमता को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने स्वच्छ भारत, गरीबों के घरों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्तिसीएनजी नेटवर्क के विकास जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया, जिसमें जीवन को आसान बनाने तथा  गरीबों और मध्यम वर्ग के जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीने का एक तरीका है।

 

एलईडी बल्बों

 

उन्‍होंने कहा कि जब नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाएं शुरू की जाती हैं तो यह सुनिश्चित किया जाता है कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रति दृढ़ संकल्प जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई दे। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इसका लाभ देश के हर कोने, समाज के हर वर्ग, हर नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने इस बारे में एलईडी बल्बों का उदाहरण पेश करते हुए बताया कि किस तरह से इनके इस्‍तेमाल ने बिजली के बिल को कम किया है। एलईडी बल्बों के इस्‍तेमाल की वजह से लगभग 4 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को पर्यावरण में जाने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि इससे 6 अरब यूनिट बिजली की बचत हुई है जिससे सरकारी खजाने के 24,000 करोड़ रुपये बचे हैं।

 

उन्होंने कहा कि सरकार ‘हमारे पर्यावरणहमारी हवाहमारे पानी को भी साफ बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है और यह सोच सौर ऊर्जानीति और रणनीति में भी दिखाई देती है। श्री मोदी ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की अनुकरणीय प्रगति दुनिया के लिए दिलचस्‍पी की एक बड़ी वजह होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रमुख कदमों के कारण, भारत को स्वच्छ ऊर्जा का सबसे आकर्षक बाजार माना जा रहा है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) को सौर ऊर्जा के मामले में पूरी दुनिया को एकजुट करने के मकसद से शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वन वर्ल्डवन सनवन ग्रिड की भावना थी।

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प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि मध्य प्रदेश के किसान सरकार के ‘कुसुम’  कार्यक्रम का भरपूर लाभ उठाएंगे और अपनी भूमि में आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा संयंत्रों को स्थापित करेंगे।उन्होंने आशा व्यक्त की कि बहुत जल्द भारत पावर का एक प्रमुख निर्यातक होगा प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत फोटोवोल्टिक सेलबैटरी और स्टोरेज जैसे सौर संयंत्रों के लिए आवश्यक विभिन्न हार्डवेयर के आयात पर अपनी निर्भरता को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

 

 

उन्होंने कहा कि इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार उद्योगयुवाओंएमएसएमई और स्टार्टअप्स को इस अवसर से न चूकने और सौर ऊर्जा के लिए आवश्यक सभी वस्‍तुओं के उत्पादन और बेहतरी के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

 

कोविड महामारी के कारण चल रहे संकट का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार या समाज के लिएकरुणा और सतर्कता इस कठिन चुनौती से निपटने के लिए सबसे बड़े प्रेरक तत्व हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की शुरुआत से ही सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और ईंधन की आपूर्ति की जाए। उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ  सरकार ने अनलॉकिंग के चरण में भी इस साल नवंबर तक खाद्य और एलपीजी की मुफ्त आपूर्ति जारी रखने का फैसला किया।यही नहीं, सरकार निजी क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों के कर्मचारी भविष्‍य निधि खाते में भी पूरा योगदान दे रही है। इसी तरह, पीएम-स्वनिधि योजना के माध्यम से वे लोग लाभान्वित हो रहे हैं जिनके पास व्‍यवस्‍था तक पहुंच के सबसे कम संसाधन हैं।

 

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब मध्यप्रदेश के लोग अपने राज्‍य को तरक्‍की के रास्‍ते पर आगे ले जाने के लिए अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं, तो ऐसे में उन्हें दो गज की दूरी बनाए रखने, चेहरे पर मास्‍क पहनने और कम से कम 20 सेंकेंड तक साबुन से हाथ धोने जैसे नियमों का पालन करना चाहिए।

 

Source: MNRE, Download Press Release Original Copy

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Comments

RAJ - August 23, 2020

Solar energy waste, but its rate is too high that’s why poor man can not buy betary and solar rate below 5000

Anubhav Tripathi - July 18, 2020

It’s a great intiative by pm modi. we should focus more on solar energy to save our environment.

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