Factory में Solar Panel लगाने के हैं कई फायदे

हाल के दिनों में भारत में सोलर सेक्टर का ग्रोथ काफी तेजी से बढ़ा है, लेकिन वास्तविकता यही है कि रेसीडेंसियल एरिया (Resisdentail Area) में इसका ग्रोथ अपेक्षाकृत काफी धीमा हो गया है। तो ऐसे में सवाल उठता है कि देश में सोलर सिस्टम का इस्तेमाल आखिर हो कहाँ रहा है?

क्या है इसका जवाब?

बता दें कि आज देश में सबसे ज्यादा सोलर पैनल का इस्तेमाल फैक्ट्रियों (Commerical & Industrail Areas) में हो रहा है। इसकी वजह यह है कि लोग बिजली कटौती (Power Cut) की स्थिति में, अपने बैकअप के रूप में जनरेटर (Generator / DG) का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यदि उन्हें अपने फैक्ट्रियों में जनरेटर के इस्तेमाल के लिए बिजली विभाग से NOC नहीं मिल पाए, तो आपका काम पूरी तरह से बंद हो सकता है। यही कारण है कि आज कई लोग विकल्प के तौर पर सोलर पैनल की ओर रुख करते हैं। 

क्या हैं प्रमुख मुद्दे?

किसी भी फैक्ट्री में दो-तीन मुद्दे काफी प्रमुख होते हैं। जैसे, पहला मुद्दा यह है कि फैक्ट्रियों में सामान्य रूप से रेसीडेंसियल एरिया जैसा कुछ नहीं होता है। उनका पूरा फोकस ROI पर आधारित होता है, कि वे कितने किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाएंगे और उसकी कीमत कितने दिनों में वसूल हो जाएगी। 

लेकिन आज बाजार में ऐसी गिनी चुनी ही कंपनियां हैं, जो फैक्ट्रियों में सोलर सिस्टम लगाने का काम करती है। और संभवतः आज के दौर में सबसे बड़ी समस्या यही है। 

क्या होते हैं फायदे?

फैक्ट्रियों में सोलर सिस्टम लगाने के मुख्य फायदे निम्म हैं -

  1. 80% तक बिजली बिल की बचत
  2. टैक्स सेविंग
  3. पर्यावरण की सुरक्षा

आज देश में जितने भी MSME’s हैं, चाहें वे किसी भी सेक्टर में अपना बिजनेस कर रहे हों, यदि वे अपनी फैक्ट्री में सोलर सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें हर महीने लाखों के बिजली बिल से तो राहत मिलेगी ही, पर्यावरण संरक्षण को भी एक नई धार मिलगी।

क्या है चुनौती?

 

अपनी फैक्ट्री में सोलर पैनल लगाने की इच्छा रखने वाले लोगों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वे सोलर सिस्टम की खामियों को अच्छे से जानते हैं। उन्हें यह बात काफी अच्छे से पता होती है कि उनकी मशीनरी ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम पर नहीं चल पाएगी।

क्योंकि अधिकांश फैक्ट्रियों में दिन के समय ही काम होता है और यदि इस दौरान बिजली चली जाए तो उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए जनरेटर चलाना काफी महंगा साबित होता है और वे इन्वर्टर पर मशीनों को ज्यादा देर तक चला नहीं सकते हैं। यही कारण है कि वे सोलर में निवेश करने से कतराते हैं।

इसके अलावा, एक और मुद्दा यह है कि लोगों के लिए सोलर सिस्टम की ओर रुख करना शुरुआती दिनों में काफी महंगा सॉल्यूशन साबित होता है। आज भले ही इस सेक्टर में सोलर सिस्टम को आशा के अनुरूप सफलता हासिल नहीं हो रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग सोलर की ओर रुख करना चाहते हैं। 

कहाँ और कैसे करते हैं इस्तेमाल?

लोग सोलर सिस्टम का इस्तेमाल वैसे जगहों पर करते हैं, जहाँ उनकी फैक्ट्री है और अपना बिल्डिंग है।वहीं, मान लीजिए कि किसी फैक्ट्री के मालिक के यहाँ बिजली बिल 1 लाख रुपये आ रहा है, तो इस तरह उनके यहाँ एक साल में करीब 12 लाख का बिजली बिल आएगा।

लेकिन यदि वे अपनी फैक्ट्री में सोलर सिस्टम लगा लेते हैं, तो वह सरकारी बिजली पर अपनी निर्भरता को 70 से 80 फीसदी तक आसानी से कम कर सकते हैं। हालांकि, आज के दौर में इसे पूरे 100 फीसदी कम करना, एकदम असंभव कार्य है।

कितने वाट के सोलर सिस्टम की पड़ेगी जरूरत?

एक फैक्ट्री में कम से कम 50 किलोवाट से लेकर 100 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम को लगाने से वे बिजली के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो जाएंगे।

कितना आएगा खर्च?

आपको प्रति किलोवाट सोलर सिस्टम लगाने में करीब 55 हजार से लेकर 60 हजार का खर्च आएगा। इस हिशाब से फ़ैक्टरी में सोलर पैनल लगवाने का खर्च लगभग Rs. 30,00,000 से Rs. 55,00,000 तक लग सकता है।

कितना होगा फ़ायदा?

सोलर सिस्टम लगवाने के बाद बिजली बिल में बचत होगा जो निर्भर करता है कितने किलवाट का सोलर सिस्टम फ़ैक्टरी के छत पर लगाया गया है। जैसे कि आप 50kW सोलर सिस्टम लगवाये है तो नीचे दिए गए आँकड़े से समझ सकते है:

Si. No. Parameters Value
1 Project Capacity 50kW
2 Investment Rs. 30,00,000
3 Generation (in 25 yrs.) Rs.15,00,000 Units
4 Electricity Amount Bill (in 25 yrs.) Rs. 1,50,00,000
5 Payback  5 yrs.
6 RoI 50x

 

कितना चाहिए स्पेस?

फैक्ट्रियों में सोलर सिस्टम को लगाने के लिए जगह की ज्यादा चिंता नहीं होती है। क्योंकि इसे टीन शेड पर आसानी से इंस्टाल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

यदि आप अपनी फैक्ट्री या घर में सोलर सिस्टम लगाना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं पता है कि आपका पहला कदम क्या हो, तो हमसे संपर्क करें। हमारे विशेषज्ञ आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। हमारे इंजीनियर आपकी साइट पर जाएंगे और आपकी जरूरतों को समझते हुए, आगे की राह दिखाएंगे।

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