सोलर सेक्टर से जुड़ने पर 10 गुना अधिक हो सकती है बिल्डरों की आमदनी, जानिए कैसे?

सोलर टेक्नोलॉजी 21वीं सदी की सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है। बीते कुछ वर्षों में, भारत में भी सोलर एनर्जी की माँग में काफी तेजी आई है और इससे देश में स्थापित क्षमता से 16 फीसदी बिजली का उत्पादन होता है। सरकार का मकसद आने वाले कुछ वर्षों में इसे कम से कम 60 फीसदी करने का है।

ऐसे में, यह जरूरी हो जाता है कि लोग सोलर एनर्जी के प्रति अधिक से अधिक जागरूक हों और इसे व्यावहारिक बनाया जा सके। तो, इस लेख में हम उन बिल्डरों को कुछ वैसे टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे वे अपनी कमाई का एक वैकल्पिक साधन विकसित करने के साथ ही, लोगों को भविष्य के लिए भी तैयार कर सकें।

बिल्डरों के लिए कितना है स्कोप?

चूंकि, किसी भी घर में सोलर पैनल लगाने के दौरान सबसे अधिक परेशानी वायरिंग में होती है। किसी पहले से बने घर में सोलर पैनल लगाने के लिए, उनकी छतों पर होल करना पड़ता है।

जिससे बारिश के मौसम में सीलन की समस्या बढ़ जाती है और छत को काफी नुकसान होता है। ऐसी किसी भी परेशानी से बचने के लिए यह जरूरी है कि घरों को बनाने के दौरान ही, सोलर एनर्जी पर विचार कर लिया जाए।

चूंकि, आजकल अधिकांश घर पिलर पर डिजाइन होते हैं और इसी दौरान पिलर को सोलर स्टैंड के अनुसार, थोड़ा सा और बढ़ा कर बना दिया जाए, तो छत पर कहीं भी होल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस तरह थोड़ी सी अधिक खर्च के बाद, आने वाले समय में काफी बड़े खतरे से बचा जा सकता है।

यह तभी होगा, जब सबकुछ पहले से तय हो। ऐसे में लोगों को जागरूक करने में बिल्डरों का महत्व काफी बढ़ जाता है और बिल्डर यह लोगों को तभी बता पाएंगे, जब वह सोलर सेक्टर से जुड़े होंगे और उन्हें इसके हर पहलू के बारे में गहराई से पता होगा कि पैनल के बेस प्लेट का डायमेंशन क्या होता है और इसके लिए पिलर को कैसे बनाया जाए।

बिल्डर्स को क्या होगा फायदा?

आज के दौर में रियल एस्टेट में आगे बढ़ना बड़ा मुश्किल है। किसी बिल्डर ने साल में दो-तीन बड़ी प्रॉपर्टी में डील कर लिया, तो बहुत बड़ी बात होती है। अन्यथा उन्हें महीनों-महीनों तक काम की तलाश रहती और इसी जद्दोजहद में वे किसी दूसरे बिजनेस में भी हाथ आजमाने लगते हैं।

ऐसे में, सोलर सेक्टर में हाथ आजमाना उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है और इसमें हर सेल पर वे 10 से 25 प्रतिशत प्रॉफिट मार्जिन का आनंद आसानी से ले सकते हैं और हर महीने अपनी एक निश्चित आय सुनिश्चित कर सकते हैं।

कैसे लें ट्रेनिंग?

यदि कोई बिल्डर सोलर एनर्जी के फिल्ड में काम करना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले हर बारीकी को समझने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी। लूम सोलर कंपनी लोगों की मदद करने के लिए हर शनिवार को फ्री में ‘Learn Solar’ नाम से एक ट्रेनिंग प्रोग्राम को चलाती है।

इस सेशन के दौरान उन्हें सोलर बिजनेस से जुड़े विभिन्न विषयों के बारे में गहराई से बताई जाती है। इसके अलावा, कंपनी द्वारा नियमित रूप से वीडियो और ब्लॉग भी पब्लिश किए जाते हैं। जिससे लोगों को काफी फायदा होता है। कंपनी के साथ फिलहाल पूरे भारत में 3500 से भी अधिक डीलर्स जुड़े हुए हैं।

कितना होगा खर्च?

कोई बिल्डर लूम सोलर के साथ के डीलर या डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम कर सकते हैं। कंपनी ने डीलरशिप के लिए 1000 रुपये का रजिस्ट्रेशन फीस निर्धारित किया है, तो डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए 5000 रुपये का।

पड़ेगी शो रूम की जरूरत

लूम सोलर के साथ एक डीलर या डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम करने के लिए जरूरी है कि आपके पास अपनी कम से कम 10x10 की एक जगह हो, जहाँ आप कुछ सोलर सिस्टम रख सकें, ताकि कोई ग्राहक यदि कुछ समझना चाहे या उन्हें कोई परेशानी हो, तो आप एक स्थानीय केन्द्र के रूप में उनके लिए उपलब्ध रह सकें।

हालांकि, अधिकांश ग्राहकों को लूम सोलर की ओर से चौबीसों घंटे ऑनलाइन सपोर्ट की सुविधा रहती है। वहीं, कंपनी अपने सभी डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों के जरिए हमेशा पूरी मदद करती है। 

कैसे जुड़ें?

1. डीलरशिप / डिस्ट्रीब्यूटर्स के तौर पर जुड़ने के लिए या अधिक जानने के लिए https://www.loomsolar.com/collections/dealers-distributor-business-opportunities-in-india पर क्लिक करें।
2. इन्फ्लुएंसर के तौर पर लूम सोलर से जुड़ने के लिए https://www.loomsolar.com/pages/become-an-affiliate-earn-money पर क्लिक करें।

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