खेती के लिए अपनाना चाहते हैं Solar Panel? ये हैं तरीके

आज खेती किसानी में लोगों को बिजली कटौती की काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अनियमित बिजली के कारण वे अपने फसलों की सिंचाई समय पर नहीं कर पाते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता भी बुरी तरह से प्रभावित होती है।

यही कारण है कि लोग बिजली के वैकल्पिक साधन के रूप में डीजल या जेनरेटर का इस्तेमाल करते हैं, जो उनके लिए काफी महंगा साबित पड़ता है। हालांकि, हाल के कुछ वर्षों में भारत में सोलर पम्प (Solar Pump Demand in India) की माँग काफी बढ़ गयी है, जिससे लोगों को बिजली के महंगे साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

क्या हैं मौजूदा नियम?

बता दें कि आज सरकार ने बिजली के अलग अलग कैटेगरी के लिए अलग अलग रेट तय किया है। जैसे - घरेलू, खेती, ग्रामीण, शहरी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए बिजली की अलग दरें तय हैं, जिसे DISCOMS द्वारा तय किये जाते हैं।

अगर आपके पास खेती के लिए बिजली कनेक्शन है, तो आप उसका इस्तेमाल अपने घरों में नहीं कर सकते हैं और यदि आपके पास घरेलू कनेक्शन है, तो आप इसका इस्तेमाल अपने खेती कार्यों में नहीं कर सकते हैं। 

और यदि आप ऐसा करते हैं, तो पकड़े जाने पर आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है और आपको भारी जुर्माना भरना पड़ता सकता है।

इससे साफ है कि आप इस कैटगरी के लिए बिजली का इस्तेमाल करना चाहते हैं, आपको उसका कनेक्शन लेना ही होगा। इसके लिए आप आवेदन कर सकते हैं, और बिजली विभाग लोकेशन तक अपना ट्रांसमिशन लाइन बिछा देगी। 

क्या होती है चुनौती?

कई बार लोग अपने घर से दूर किसी व्यवसायिक मकसद के लिए बिजली का इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन इस दौरान उन्हें कई खेतों से होकर गुजरना पड़ता है और खेत के मालिक अपने खेत में बिजली का खम्भा गड़ने से साफ मना कर देते हैं।

ऐसी स्थिति में, उन्हें बिजली नहीं मिल पाती है और वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं। या इस खर्च से बचने के लिए वे दूर दूर से तार लेकर आते हैं। लेकिन इससे Low Voltage की काफी समस्या रहती है।

वहीं, कई लोग खेती में वाटर पम्प इसलिए नहीं लगाना चाहते हैं, कि पानी की समस्या उनके लिए कोई स्थायी समस्या नहीं होती है और यदि बारिश हो जाए, तो उन्हें पानी के लिए मोटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। और अगर बीच में कहीं जरूरत पड़ती है, तो वे डीजल इंजन से काम चला लेते हैं।

यही कारण है कि किसानों का रूझान Solar Pump की ओर भी कम ही जाता है। लेकिन सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए PM KUSUM योजना को लॉन्च किया है।

बता दें कि खेती के क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना की शुरुआत साल 2019 में हुई थी।

तीन चरण हैं PM KUSUM योजना के

बता दें कि इस महत्वाकांक्षी योजना को तीन भागों में बांटा गया है। जो निम्न हैं -

पहला - इस योजना के पहले चरण के तहत वैसे किसानों को लक्षित किया गया है, जो अपने खेती कार्यों में डीजल इंजन का इस्तेमाल करते हैं। इसके तहत, आपके पास जितने पावर का डीजल इंजन है, उसकी जानकारी आप अपने नजदीकी किसान बैंक या शाखा में जमा कर सकते हैं। इस जानकारी के आधार पर आपको सोलर पैनल खरीदने के बाद सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

दूसरा - इस चरण के तहत वैसे लोगों को कवर करने की कोशिश की गई है, जो अपने खेती कार्यों में डीजल इंजन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और वे सिर्फ सरकारी बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में वे अपना सोलर पैनल लगा लें, उनको नेट मीटर सरकार लगवा कर देगी।

इसका फायदा यह है कि जिस मौसम में उन्हें पानी की जरूरत है, वे बिजली का इस्तेमाल करेंगे और जो बिजली बच जाएगी, सरकार उसे खरीद लेगी और इसके बदले में आपको पैसे मिल सकते हैं या इसे आपके बिल में ही एडजस्ट किया जा सकता है।

तीसरा - इसके योजना के तीसरे चरण के तहत, बड़े स्तर पर सोलर पावर प्लांट लगाने के मकसद को निर्धारित किया गया है। इसके तहत आप अपने खेत में सोलर पैनल लगा सकते हैं और इससे अपनी खेती करने के साथ ही, अतिरिक्त बिजली को किसी को बेच कर अपना बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं।

क्या हैं योजना के फायदे?

इस योजना के तहत, केन्द्र सरकार आपको सोलर पैनल खरीदने पर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी देती है। इसके अलावा आपको बैंक की ओर से 30 प्रतिशत तक कर्ज भी मिलता है। वहीं, बाकी 10 प्रतिशत आपके अपना निवेश करना होगा। 

वहीं, जो पीएम कुसुम योजना का इंतजार नहीं करना चाहते हैं, वे किसी प्राइवेट सोलर कंपनी से संपर्क कर सकते हैं और अपने खेतों में सोलर पैनल लगा सकते हैं। 

क्या है जरूरी?

इस दिशा में कदम बढ़ाने से पहले, सबसे पहले यह चेक करना जरूरी है कि आपका मोटर डीसी है या एसी।

यदि कोई चाहते हैं कि वह अपना मोटर बिजली पर चलाएं, तो इसके लिए जाहिर तौर पर एसी मोटर होगा। वहीं, जिनको यह पता है कि उनके लोकेशन पर कभी बिजली नहीं जाएगी, तो वे डीसी मोटर का चुनाव कर सकते हैं। साथ ही, यह पानी के स्तर के अनुसार भी तय होता है। 

खेतों तक दो तरीके से पहुँचता है पानी

इसका सबसे पहला तरीका यह है कि जमीन से पानी निकालने के लिए समर्सिबल मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन सरकार की नजर में समर्सिबल से पानी निकालना अवैध है और यदि आप ऐसा करना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए लाइसेंस लेना होगा। अन्यथा आप किसी मुसीबत में फंस सकते हैं। 

वहीं, दूसरा तरीका यह है किसी नहर या तालाब में जमा पानी को खेतों तक पहुँचाना।

बदल जाती हैं सोलर पैनल की जरूरतें भी 

ऐसे में, दोनों ही जरूरतों में सोलर पैनल की जरूरतें भी बदल जाती हैं। यदि आपको जमीन से पानी निकालना है, तो आपके पास जितने एचपी का मोटर है, उससे 1.5 गुना ज्यादा के सोलर पैनल की जरूरत होगी।

इससे आप सुबह 7 बजे से लेकर शाम में करीब 5.30 बजे तक अपने खेतों की सिंचाई आसानी से कर सकते हैं।

वहीं, यदि आप पानी को एक जगह से दूसरे जगह तक ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो इसके लिए सामान्य DC Pump भी पर्याप्त है और इसके लिए आपको सिर्फ 4 सोलर पैनल की जरूरत होगी।

बता दें कि 4 सोलर पैनल से आप 2 एचपी के मोटर को आसानी से चला सकते हैं। इससे पानी का डेरीवरेबल करीब 3 इंच का रहता है, जिससे आप 45 मिनट में ही 5000 लीटर पानी को आसानी से निकाल सकते हैं।

क्या होता है डर?

चूंकि, खेती रिमोट एरिया में होते हैं। इसलिए खेतों में सोलर पैनल लगाना उतना सुरक्षित नहीं माना जाता है और हमेशा इसके चोरी होने का डर रहता है।

वहीं, इससे टूटने का भी काफी डर रहता है। इन दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए लोग अपने ट्रैक्टर पर ट्रॉली बना लेते हैं और उसमें सोलर पैनल लगा देते हैं। और शाम में काम होते ही इसे अपने घर ले आते हैं।

कितना होता है खर्च?

आप जितने एचपी का मोटर होगा, उसके आधार पर आपको प्रति एचपी 1 लाख रुपये का खर्च होगा।

सामान्य रूप से खेती कार्यों में 3 एचपी, 5 एचपी, 7.5 एचपी, 10 एचपी, 15 एचपी के मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। लोग इसका चयन अपनी जरूरत के हिसाब से करते हैं।

निष्कर्ष 

हमें यकीन है कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। यदि आप अपने खेती कार्यों के लिए सोलर पैनल (Use of Solar Panels in Farming) अपनाना चाहते हैं, तो अभी हमसे संपर्क करें। हमारे विशेषज्ञ आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

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