किसी भी तरह की दुकानदारी के लिए बिजली बेहद जरूरी है क्योंकि अगर आप ग्राहकों को अगर हर तरह का आराम और सुविधा देना चाहते हैं तो बिजली बेहद जरूरी है। इस सारे मामले में समस्या है कि दुकानदारी के लिए बिजली का कमर्शियल कनेक्शन जल्दी नहीं मिलता है और उनको कनेक्शन मिलने तक का इंतजार करना पड़ता है। ऐसी दुकानों के लिए बिजली और भी अधिक जरूरी है, जो कि बिजली कनेक्शन मिलने तक अपना काम ही शुरू नहीं कर सकते हैं। जैसे प्रिंटिंग प्रेस, फोटो कॉपी, सैलून आदि की दुकान।
ऐसे में दुकानदार अक्सर काम जल्दी शुरू करने के लिए अक्सर इनवर्टर बैटरी खरीद लेते हैं लेकिन बिना बिजली के उसको चार्ज कैसे करें, उनके लिए ये एक बड़ी समस्या बन जाती है। वहीं दूर दराज के क्षेत्र में दुकान हैं तो वहां पर बिजली का कनेक्शन लेना और भी बड़ी समस्या है। कई दुकानदार अपनी दुकान पर लाइट के लिए लगाए गए इनवर्टर को चार्ज करने के लिए अपने पास उपलब्ध जगह और क्षमता के अनुसार सोलर पैनल आदि लगा लेते हैं, लेकिन ये कोई स्थाई समाधान नहीं है, पर इससे उनका काम चल जाता है। वे अपने इनवर्टर को भी दिन के समय सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही उसे चार्ज कर पाते हैं।
ऐसे में अगर आप एक सोलर सिस्टम लगा लेते हैं तो आपकी कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। जिन दुकानदारों के पास दुकान के आगे या साइड में पैनल लगाने की जगह है, वे उससे लगातार अपनी जरूरत के अनुसार बिजली प्राप्त कर सकते हैं। वहीं जिन दुकानदारों के पास अपनी छत है तो वे रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाकार स्थाई तौर पर बिजली की समस्या का समाधान कर सकते हैं। वे बिजली प्राप्त करने के साथ ही अपने बिजली के बिल में भी अच्छी खासी बचत कर पाते हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के लिए सोलर पैनल लगाकर सोलर सिस्टम से क्लीन बिजली प्राप्त करने का रूझान लगातार बढ़ रहा है और दुकानदार भी अब तेजी से इसे अपना रहे हैं।
सोलर सिस्टम एक - समस्याएं होंगी कई हल
कई दुकानदार इस बारे में भी पूछ रहे हैं कि वे कैसे अपने बिजली का बिल कम कर सकते हैं? कोरोना के दौर में लोगों की दुकानदारी प्रभावित हुई है और कमाई भी कम हुई है। ऐसे में वे अपना खर्च कम करना चाहते हैं और बिजली के बिल में भी कमी लाना चाहते हैं ताकि वे हर महीने बचत कर सकें। ऐसे में उनके लिए सबसे पहला सवाल होता है कि उनको किसी क्षमता का सोलर सिस्टम लगाना चाहिए। इस सवाल के लिए सबसे पहले दुकान का लोड देखना होगा और इसे जानने के लिए ये देखना होगा कि दुकान पर किस तरह के उपकरण या लाइट आदि को चलाया जाता है। उनको कितना और किसी समय तक चलाया जाता है और वे एक दिन में कितनी देर चलाने पर कितनी बिजली की खपत करते हैं।
"मान लो किसी स्टेशनरी की दुकान पर एक लेमिनेशन की मशीन (Lamination Machine) है तो वह 600 से 700 वॉट पर चलती है। लेकिन वह पूरे दिन में एक घंटा ही चलती है। वहीं दुकान में अगर एक कंप्यूटर (Computer) है तो वह अक्सर काफी समय तक या पूरा दिन चलता है और वह 200 से 250 वॉट बिजली की खपत करती है। वहीं दुकान में एक कमर्शियल प्रिंटर (Printer) भी है तो वह काफी बिजली लेता है। हालांकि वह दिन में एक-दो घंटे ही चलता है लेकिन उसके लिए 2000 वॉट की बिजली की जरूरत पड़ती है और ये सबसे अधिक बिजली लेता है।
इसके बाद दुकान में होते हैं लाइट और पंखें। गर्मियों में पंखा पूरा दिन चलता है और लाइट्स भी काफी समय तक चलती हैं। हालांकि आजकल के पंखें या एलईडी लाइट्स काफी कम बिजली ही लेती हैं। इन सब की खपत का पता बिजली के मीटर पर से पता लगाया जा सकता है। एक औसत बूथ या दुकान का लोड क्लैम्प मीटर से पता किया जा सकता है और इतने उपकरण होने पर 4 एम्पेयर का लोड आता है। अगर आप वॉट पता करना चाहते हैं तो एक एम्पेयर को 230 से गुणा कर कुल लोड का पता लगाया जा सकता है। वहीं जितने उपकरण एक साथ चलेंगे, उसी अनुसार बिजली की खपत बढ़ती जाएगी।
सोलर सिस्टम लगाना कहां हैं?
इसके बाद आता है कि दुकान के लिए सोलर सिस्टम को कहां पर लगाया जा सकता है। आपके पास इसे लगाने के लिए कितनी जगह है। अधिकांश दुकानों के पास सोलर पैनल लगाने के लिए कोई जगह नहीं होती है और ऐसे में उनको इस संबंध में खास ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही ऐसी जगह की भी तलाश करनी पड़ती है, जिस पर छाया कम से कम आए और अधिकांश समय धूप आए। वहीं अक्सर दुकानों पर स्थाई सोलर सिस्टम लगाने की जगह नहीं होती है तो उनके लिए एक पोर्टेबल सोलर सिस्टम भी लगाया जा सकता है।
दुकान के इलेक्ट्रिक अप्लायंसेज, लोड, खपत और सोलर पैनल लगाने की जगह आदि के बारे में पूरी जानकानी हासिल करने के बाद आपको देखना होता है कि आपको वहां पर बिजली की कितनी समस्या पेश आ रहा है। वहां पर बिजली कितना जाती है या कितना समय रहती है, क्या 24 घंटे बिजली उपलब्ध रहती है। ऐसे में ये देखना होगा कि वहां पर कौन सा सोलर सिस्टम लगाया जा सकता है।
कितने वॉट का सोलर सिस्टम लगवाना है?
इस सब के बाद आप जब किसी सोलर सिस्टम लगाने वाली कंपनी के पास जाते हैं तो आपको इन सभी उपकरणों के आधार पर सबसे पहले 3 किलोवॉट का सिस्टम लगाने की सलाह दी जाएगी। लेकिन आपको इन उपकरणों के साथ 3 किलोवॉट का सिस्टम लगाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इनमें से अधिकांश उपकरण एक साथ नहीं चलेंगे और वे दिन में एक दो घंटे के लिए चलते हैं। ऐसे में इनको ग्रिड पर डायरेक्ट भी चलाया जा सकता है।
ऐसी एक दुकान की मासिक बिजली की खपत 40 यूनिट के आसपास होती है। ऐसे में एक सोलर पैनल से एक दिन में 1 से 1.5 यूनिट तक की बिजली प्राप्त की जा सकती है। ये सोलर पैनल 375 से 400 वॉट के होते हैं। इससे हर महीने कम से कम 30 यूनिट को न्यूनतम प्राप्त किए जा सकते हैं। अगर स्टेशनरी की दुकान को मॉडल मान ले तो यहां पर एक साथ सभी इलेक्ट्रिक अप्लाएंसेज को एक साथ चलाने की बजाए जरूरत के समय लाइट्स के साथ एक अप्लाएंस को चलाया जाए तो आप एक किलोवॉट के सोलर सिस्टम से अपनी बिजली की जरूरतों को अच्छी तरह से पूरा कर सकते है।
लूम सोलर का पोर्टेबल सोलर सिस्टम-एक बेहतर विकल्प
ऐसे में, लूम सोलर आपको पोर्टेबल सिस्टम का सॉल्यूशन प्रदान करता है, जिसको आप अपनी दुकान के बाहर किसी कोने में लगा सकते हैं और शाम को उठाकर दुकान के अंदर भी रख सकते हैं। अगर आपके पास दुकान की छत्त है तो आप वहां पर काफी आसानी से पोर्टेबल सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। इसके अलावा अगर आप अपनी दुकान में एसी या कोई अन्य उपकरण लगा रहे हैं, जिसकी बिजली की खपत ज्यादा है तो आप दो या तीन किलोवॉट के सोलर सिस्टम का विकल्प भी अपना सकते हैं। इस सिस्टम के लिए आपके पास रूफटॉप सोलर सिस्टम का ही विकल्प अपनाएं।
बेहतर क्वालिटी वाले सिस्टम का ही उपयोग करें
इस दौरान आप को एक और बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी हालत में उपकरणों के रखरखाव में कोताही ना करें और सिस्टम के लिए बेहतर वॉयर्स, कनेक्टर्स और अच्छी क्वालिटी की बैटरी का उपयोग करें। दुकानों के मामले में विशेष सतर्क रहने की जरूरत होती है क्योंकि कई बार कनेक्टर का उपयोग करने की बजाए तारों को ऐसे ही जोड़ दिया जाता है और उसमें स्पार्क होने की स्थिति में आग लगने की संभावना बन जाती है, जिसको कनेक्टर का उपयोग कर खत्म किया जा सकता है।
ये भी देखा गया है कि दुकानदारों के पास अक्सर अपना कनवर्टर होता है और सोलर सिस्टम लगाने के दौरान उसी बैटरी का उपयोग कर अपनी लागत खर्च को कम किया जा सकता है। आपको सिर्फ सोलर पैनल आदि ही खरीदने की जरूरत पड़ेगी। वायरिंग पहले से हुई है तो उसका खर्च भी बच जाएगा। यानि आप काफी कम खर्च में अपनी दुकान पर सोलर सिस्टम से बिजली प्राप्त करने का बेहतर इंतजाम कर सकते हैं। वहीं इस बैटरी को दुकान पर लगे मीटर से भी जोड़ कर अपनी सुविधानुसार बिजली के सोर्स को बदला जा सकता है। यानि आप अपनी इच्छा से ग्रिड से आने वाली बिजली या फिर सोलर सिस्टम पर कनवर्ट कर सकते हैं।
सस्ते विकल्प से बचें
अगर आप अपनी दुकान या ऑफिस के लिए सोलर सिस्टम को लगवाना चाहते हैं तो आप लूम सोलर सिस्टम के प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकते हैं। इस पूरे मामले में आपको एक बात का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए कि आप किसी भी सस्ते विकल्प को अपनाने से बचे क्योंकि लंबी अवधि में वह आपका खर्च अधिक करवाएगा और बार-बार रिपेयर की परेशानी पैदा करेगा। ऐसे में शुरूआत में ही एक बेहतर सोलर सिस्टम लगवाकर लंबे समय तक अपनी समस्याओं से राहत प्राप्त कर सकते हैं।