उत्तर प्रदेश में सब्सिडी के साथ 3kW सोलर पैनल सिस्टम लगाने का कितना खर्च आता है?

उत्तर प्रदेश में सब्सिडी के साथ 3kW सोलर पैनल सिस्टम लगाने का खर्च कितना पड़ता है? उत्तर भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है, जिसकी राजधानी लखनऊ है, जिसे नवाबों का शहर भी कहा जाता है। इस राज्य की जनसंख्या लगभग 25 करोड़ है, और यहां करीब 6 करोड़ घर हैं। यह राज्य कई जिलों के लिए प्रसिद्ध है, जैसे वाराणसी गंगा घाट और कपड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है। आज हम जानेंगे कि यदि कोई उत्तर प्रदेश में घर के लिए सब्सिडी के साथ सोलर पैनल लगवाना चाहता है, तो उसे कितना खर्च करना पड़ेगा?

Table of Contents:

  1. बिजली बिल का अध्ययन
  2. सोलर सिस्टम का चयन
  3. इंस्टॉलेशन एरिया का सर्वे
  4. सोलर उत्पादों का चयन
  5. सोलर सिस्टम लगाने के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया
  6. सोलर कोटेशन
  7. सोलर लोन
  8. सोलर पैनल सिस्टम इंस्टॉलेशन
  9. नेट मीटरिंग प्रक्रिया
  10. सब्सिडी प्रक्रिया

बिजली बिल का अध्ययन  (Study of Electricity Bill)

जब हम किसी उपभोक्ता के घर जाते हैं, तो बातचीत के दौरान बिजली बिल का अध्ययन करते हैं, जिसमें यह देखा जाता है कि कितने किलोवाट का मीटर मंजूर किया गया है। अधिकतर मामलों में, बिजली बिल में स्वीकृत लोड कम होता है और घर की खपत अधिक होती है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले स्वीकृत लोड बढ़ाने के लिए आवेदन किया जाता है, उसके बाद सोलर लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है। कई बार बिजली बिल में उपभोक्ता का नाम बदलने या सही करने की आवश्यकता होती है। बिजली बिल से जुड़े सभी काम नजदीकी बिजली विभाग से होते हैं।

सोलर सिस्टम का चयन  (Selection of Rooftop Solar System)

types of solar system

रूफटॉप सोलर सिस्टम वो सोलर सिस्टम होते हैं जो छत पर लगाए जाते हैं, चाहे वह घर, ऑफिस, होटल, स्कूल, या फैक्ट्री हो। घर के रूफटॉप सोलर सिस्टम तीन प्रकार के होते हैं - ऑन ग्रिड, ऑफ ग्रिड, और हाइब्रिड सोलर सिस्टम। यदि आप सब्सिडी स्कीम के तहत लगवाना चाहते हैं, तो ऑन ग्रिड या हाइब्रिड सोलर सिस्टम लगा सकते हैं। इन सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर वह बिजली विभाग को चली जाती है, और रात में आप बिजली का उपयोग करते समय वह बिजली विभाग से वापस आती है। इस पूरी प्रक्रिया को इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट और नेट बिलिंग कहते हैं।

इंस्टॉलेशन एरिया का सर्वे  (Survey of Installation Area)

सोलर पैनल लगाने के लिए ऐसी जगह की जरूरत होती है, जहां दिन में धूप अच्छी आती हो, चाहे वह जगह छत हो या बालकनी। कई उपभोक्ता सोलर पैनल ऐसे स्थानों पर लगाते हैं, जहां पानी की टंकी रखी हो। इसके इंस्टॉलेशन के लिए हाई राइज़ सोलर स्टैंड या टिन शेड स्टैंड का उपयोग किया जाता है।

सोलर उत्पादों का चयन  (Selection of Solar Products)

रूफटॉप सोलर सिस्टम में कई उपकरण लगते हैं, जैसे सोलर पैनल, इनवर्टर, और इंस्टॉलेशन किट। आजकल TOPCon Bifacial सोलर पैनल नई तकनीक है, जो दोनों तरफ से बिजली बनाता है। इसके अलावा, ऑन ग्रिड और हाइब्रिड इनवर्टर की नई तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है।

सोलर लगाने का खर्च  (Solar Quotation)

सोलर सिस्टम लगाने के बाद उपभोक्ता को सोलर कोटेशन दिया जाता है, जिसमें सभी उपकरणों की जानकारी दी जाती है। उत्तर प्रदेश में सोलर लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से ₹1,08,000 की सब्सिडी मिलती है, जो सोलर पैनल लगाने के 4-5 महीने बाद उपभोक्ता के बैंक खाते में जमा होती है। इसका मतलब है कि सोलर सिस्टम लगाने के लिए सबसे पहले ₹1,80,000 खर्च करने होंगे, बाद में सब्सिडी वापस मिल जाएगी।

सब्सिडी के द्वारा सोलर पैनल लगाने के लिए कहाँ संपर्क करें?

सब्सिडी स्कीम के तहत सोलर पैनल लगाने के लिए MNRE और Nodal Agency द्वारा नियुक्त सोलर वेंडर्स से संपर्क किया जा सकता है। लूम सोलर, जो उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में काम करता है, एक अधिकृत वेंडर है। जब आप सोलर एप्लिकेशन जमा करेंगे, तो लूम सोलर का नाम आएगा, जिससे आप चयन कर सकते हैं। इसके बाद हमारी टीम आपके घर जाकर सोलर से संबंधित जानकारी प्रदान करेगी।

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